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₹17 लाख करोड़ खतरे में? एनपीएस कर्मचारी संघ ने ₹17,000 करोड़ के स्टार्टअप निवेश पर पीएम से सीएजी ऑडिट मांगा

ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन एनपीएस ट्रस्ट को भंग करने की मांग कर रहा है और 20 दिसंबर को पीएफआरडीए के घेराव की चेतावनी दी है। उसके दावों की पुष्टि होनी बाकी है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के सबसे बड़े संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि करीब एक करोड़ केंद्रीय और राज्य सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत, यानी करीब ₹17 लाख करोड़ का कोष, गंभीर वित्तीय जोखिम में पड़ सकता है।

शिकायत के केंद्र में पेंशन कोष से ₹17,000 करोड़ का एक प्रस्तावित निवेश है, जो दो ऐसी कंपनियों में किया जाना है जिन्हें संघ स्टार्टअप बताता है, अल्टिरा कैपिटल और ट्राइफेक्टा। संघ का कहना है कि यह निवेश पर्याप्त गारंटी के बिना तय किया गया।

संघ क्या चाहता है

ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी है। उन्होंने एनपीएस ट्रस्ट को तुरंत भंग करने और उसके कामकाज की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

पटेल ने कहा, "हम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से व्यापक ऑडिट, सार्वजनिक धन को हुए किसी भी नुकसान की वसूली और कथित वित्तीय व प्रशासनिक चूक के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं।"

शिकायत में इन बातों की जांच मांगी गई है:

  • ₹17,000 करोड़ की प्रतिबद्धता कैसे हुई
  • दोनों कंपनियों को चुनने से पहले क्या जांच-पड़ताल की गई
  • कर्मचारियों के योगदान की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम हैं
  • क्या इसमें हितों का टकराव था

इसमें एनपीएस ट्रस्ट और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की पड़ताल की भी मांग है।

एनपीएस दिवस के चेक

विवाद तब और बढ़ा जब खबरों के मुताबिक एनपीएस दिवस पर दोनों कंपनियों को ₹400 करोड़ के प्रतीकात्मक चेक सौंपे गए। पटेल ने सवाल उठाया कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत का इतना बड़ा हिस्सा बिना साफ सुरक्षा उपायों के जोखिम भरे उपक्रमों में क्यों लगाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकरण ने पेंशन निवेश ढांचे में एनपीएस ट्रस्ट, पीएफआरडीए, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल और निजी सलाहकारों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, और पूछा कि "ये संस्थाएं सार्वजनिक धन स्टार्टअप में कैसे लगा सकती हैं"।

रिटर्न और आईएलएंडएफएस से तुलना

पटेल ने प्रदर्शन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "पिछले पांच वर्षों में सार्वजनिक रिटायरमेंट फंड पर रिटर्न असंतोषजनक रहा है और पिछले साल यह नकारात्मक हो गया।"

उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) के डूबने से तुलना की और चेताया कि कथित चूक का असर उस संकट में बताए गए ₹92,000 करोड़ के आंकड़े से कई गुना ज्यादा गंभीर हो सकता है।

शिकायत में वित्तीय लापरवाही, प्रशासनिक विफलता और निजी कंपनियों को तरजीह देने के आरोप लगाए गए हैं, और चेताया गया है कि इन फंड की सुरक्षा में कोई भी चूक लाखों कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती है।

कौन प्रभावित है

संघ एनपीएस सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें करीब 28 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और लगभग 70 लाख राज्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। पटेल ने बताया कि शिकायत की प्रतियां केंद्रीय वित्त मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सीएजी, कैबिनेट सचिव और वित्त सचिव को भेजी गई हैं।

संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कदम नहीं उठाया तो वह 20 दिसंबर को पीएफआरडीए दफ्तर का घेराव करेगा।

इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और यह लिखे जाने तक एनपीएस ट्रस्ट, पीएफआरडीए और दोनों कंपनियों ने इन पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

रायसीना वायर विश्लेषण

इस सौदे की खूबियां जो भी हों, शिकायत एक ऐसे सवाल को छूती है जो और तीखा होता जाएगा: सरकारी कर्मचारियों की अनिवार्य पेंशन योजना को कितना जोखिम उठाना चाहिए, और इसका जवाब कौन देगा? किसी स्वैच्छिक निवेशक के उलट, एनपीएस सदस्य इससे बाहर नहीं निकल सकता, इसलिए पैसा कहां जा रहा है, इस पर पारदर्शिता का पैमाना ऊंचा होना चाहिए।

मामला सुलझाने का सबसे तेज रास्ता खुलासा है। अगर ₹17,000 करोड़ की प्रतिबद्धता ठोस है, तो एनपीएस ट्रस्ट और पीएफआरडीए जांच-पड़ताल, सुरक्षा उपाय और शर्तें सार्वजनिक कर सकते हैं। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो संघ जिस तरह के सीएजी ऑडिट की मांग कर रहा है उसे टालना मुश्किल होगा, और करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों की पेंशन को लेकर चिंता बढ़ती रहेगी।