जॉर्डन · आतंकी हमला
जॉर्डन में चर्च पर हमला: अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकधारियों की फायरिंग में 9 की मौत, CCTV में दिखे तीन हमलावर
जॉर्डन ने करक चर्च गोलीबारी को आतंकी हमला बताया और कड़ी से कड़ी सजा का वादा किया। हमलावरों की पहचान और मकसद अब भी अज्ञात है।

दक्षिणी जॉर्डन के करक प्रांत के हमूद गांव में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सेंट जॉर्ज ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में एक अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकधारियों ने शोक मनाने आए लोगों पर गोलियां चला दीं।
अधिकारियों ने शुरुआत में 7 लोगों की मौत और 34 के घायल होने की जानकारी दी थी। जॉर्डन के सार्वजनिक सुरक्षा निदेशालय के मुताबिक, शनिवार तक मृतकों की संख्या 9 हो गई, जब गंभीर रूप से घायल दो लोगों ने प्रिंस अली मिलिट्री अस्पताल में दम तोड़ दिया। जॉर्डन के अधिकारियों के हवाले से आई कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या 40 बताई गई है।
सरकार ने इसे चरमपंथियों का आतंकी हमला बताया है और तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। हमलावरों की पहचान नहीं हुई है और अब तक किसी गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की गई है।
CCTV में क्या दिखा
जॉर्डन के सरकारी प्रसारक अल-ममलका पर दिखाए गए सुरक्षा कैमरे के फुटेज में हैंडगन लिए दो लोग चर्च की ओर बढ़ते और गोलियां चलाते दिखाई देते हैं। फिर एक तीसरा व्यक्ति, जिसके हाथ में सेमी-ऑटोमैटिक राइफल दिखती है, उनके साथ आ मिलता है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों फुटपाथ से फायरिंग करते हैं, पेड़ों और एक नीची दीवार के पीछे छिपते हैं और फिर चर्च के प्रवेश द्वार की ओर भागते हैं।
रॉयटर्स ने कहा कि उसने प्रवेश द्वार के आसपास की चीजों, जैसे रास्ते और चारदीवारी, के आधार पर फुटेज की पुष्टि की है। अकेले फुटेज से यह पता नहीं चलता कि हमले में कितने लोग शामिल थे।
चश्मदीदों ने क्या कहा
शोक सभा में मौजूद डोरघम हलासा ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि अंतिम संस्कार शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद भारी गोलीबारी शुरू हुई और लोग जान बचाकर भागे। उन्होंने खुद बंदूकधारियों को नहीं देखा, लेकिन कहा कि दूसरों ने उन्हें बताया कि चार लोग शामिल थे। एपी इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
एक अन्य चश्मदीद खालिद बुरकान ने जॉर्डन के सरकारी टीवी को बताया कि बंदूकधारी चर्च के अंदर और बाहर जमा लोगों पर कई मिनट तक गोलियां चलाते रहे।
अम्मान का जवाब
किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा कि जॉर्डन "करक को निशाना बनाने वाले आतंकी कृत्य का कड़ी से कड़ी सजा के साथ मुकाबला करेगा"। एबीसी न्यूज के मुताबिक, शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में उन्होंने जॉर्डन के लोगों की सुरक्षा को "लाल रेखा" बताया और सुरक्षा बलों को "सख्ती" से जवाब देने का आदेश दिया।
प्रधानमंत्री जाफर हसन ने इसके लिए चरमपंथी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराया। गृह मंत्री माजिन अल फराये ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमलावरों के देश के अंदर या बाहर किसी ज्ञात संगठन से संबंध थे या नहीं।
जॉर्डन में चर्च प्रमुखों की परिषद ने हमले की निंदा की और कहा कि जॉर्डन के मुसलमानों और ईसाइयों के बीच का रिश्ता उन्हें बांटने की हर कोशिश से ज्यादा मजबूत साबित होगा। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन, सीरिया के विदेश मंत्रालय और इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने भी हमले की निंदा की।
करक का इतिहास
करक में ईसाई अल्पसंख्यक रहते हैं। यहां पहले भी हमले हो चुके हैं। 2016 में हुए सिलसिलेवार हमलों में बंदूकधारियों ने 10 लोगों की जान ले ली थी, जिनमें सात पुलिसकर्मी थे। इनमें शहर के क्रूसेडर किले के पास हुआ हमला भी शामिल था, जो पर्यटकों में लोकप्रिय है। लंबी मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने हमलावरों को मार गिराया था।
रायसीना वायर विश्लेषण
जॉर्डन भारत के लिए अपने आकार से कहीं ज्यादा अहमियत रखता है। जंग से घिरे क्षेत्र में यह एक स्थिर और उदार देश है, आतंकवाद के खिलाफ साझेदार है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रहते हैं।
अंतिम संस्कार के बीच चर्च पर हमला उस चीज पर चोट है, जिसे अम्मान सबसे ज्यादा पेश करता है: सामाजिक शांति और धर्मों के बीच सद्भाव। अहम सवाल अब भी खुले हैं। बंदूकधारी कौन थे, उन्होंने अकेले हमला किया या किसी संगठन के लिए, और क्या यह एक स्थानीय मॉड्यूल था या जॉर्डन की सीमाओं के बाहर तक पहुंच रखने वाला कोई नेटवर्क?
जब तक जांचकर्ता इन सवालों का जवाब नहीं देते, यह हमला चेतावनी है कि पश्चिम एशिया में चरमपंथी हिंसा क्षेत्र के शांत इलाकों तक भी पहुंच सकती है। यह हर उस देश के लिए चिंता की बात है, भारत समेत, जो जॉर्डन की स्थिरता पर भरोसा करता है।