पूर्वोत्तर · NIA मामला
NIA के म्यांमार मामले में अमेरिकी नागरिक वैनडाइक दिल्ली लौटे, जब्त सामान वापस मांगा
म्यांमार के हथियारबंद गुटों को ट्रेनिंग देने के आरोपी वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों पर आतंक नहीं, आव्रजन के आरोप; फरवरी तक विदेश में रह सकेंगे

म्यांमार में हथियारबंद गुटों को कथित तौर पर ट्रेनिंग देने के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले में आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली लौट आए और अदालत से एजेंसी की जब्त की गई अपनी चीजें लौटाने की मांग की।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक महीना बिताने के बाद वह राउज एवेन्यू की विशेष NIA अदालत में खुद पेश हुए और अपने निजी सामान को छोड़ने के लिए अर्जी दाखिल की। अदालत ने अभी इस पर सुनवाई नहीं की है।
उनके साथ आरोपी छह यूक्रेनी नागरिक नहीं लौटे। उन्होंने विदेश में और समय मांगा था, और द हिंदू के अनुसार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई में शामिल हुए। अदालत ने अब सातों को 24 फरवरी 2027 तक भारत से बाहर रहने की इजाजत दे दी है।
अब तक का मामला
NIA ने सातों को मार्च में गिरफ्तार किया था। वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया, और उसी दिन तीन यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली हवाई अड्डे पर। छह यूक्रेनी नागरिक हैं पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियान स्टेफानकिव, मक्सिम होन्चारुक और विक्टर कामिंस्की।
एजेंसी का आरोप है कि यह समूह जरूरी परमिट के बिना मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में दाखिल हुआ और सीमा पार कर म्यांमार गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी का कहना है कि वहां उन्हें म्यांमार के जातीय हथियारबंद गुटों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन असेंबली और जैमिंग की ट्रेनिंग देनी थी, और वे करीब 5 मार्च को भारत लौटे।
द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में NIA ने अदालत को बताया कि सातों पहले भी मिजोरम के रास्ते गए थे और ट्रेनिंग दी थी।
आतंकी मामला, पर आतंकवाद की धाराएं नहीं
मामला आतंकी साजिश के तौर पर दर्ज हुआ था। लेकिन 8 सितंबर को, यानी 180 दिन की समय सीमा के आखिरी दिन, जब NIA ने आरोप पत्र दाखिल किया, तो उसमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम नहीं लगाया गया। आरोपियों पर सिर्फ आव्रजन कानून, यानी इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगे, जो अवैध प्रवेश, ठहरने और आवाजाही से जुड़ी हैं।
इससे जमानत का रास्ता खुला। 18 सितंबर को विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने वैनडाइक को 1 लाख रुपये के मुचलके और जमानत पर डिफॉल्ट बेल दी। यूक्रेनी नागरिकों को भी जमानत मिली, और सितंबर के आखिर में अदालत ने सातों को एक महीने के लिए अपने परिवारों से मिलने तिहाड़ जेल से जाने दिया, इस शर्त पर कि वे 23 अक्टूबर तक लौटेंगे।
यह क्यों अहम है
यह मामला भारत की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक से जुड़ा है। मिजोरम की सीमा म्यांमार से लगती है, जहां जातीय हथियारबंद गुट सालों से सेना से लड़ रहे हैं, और आरोपों के केंद्र में ड्रोन युद्ध है। विदेशी नागरिकों का कथित तौर पर भारत के पूर्वोत्तर से गुजरकर सीमा पार हथियारबंद गुटों को ट्रेनिंग देना, परमिट, निगरानी और सीमा नियंत्रण पर कड़े सवाल उठाता है।
जांच अभी खत्म नहीं हुई है, और NIA ने कहा है कि उसकी जांच जारी है। लेकिन अब तक का मामला दिखाता है कि इसे जिस तरह पेश किया गया और जो आरोप लगे, उनके बीच फासला है। वैनडाइक की वापसी और जब्त सामान वापस पाने की उनकी कोशिश इस सवाल को केंद्र में रखती है कि क्या एजेंसी साजिश के अपने बड़े आरोपों को अदालत में साबित कर पाएगी।
फिलहाल सातों 24 फरवरी 2027 तक विदेश में रह सकते हैं।